मीरा जैसी

तुम आसमान से
मैं पानी सी
तुम हवा से
और मैं बादल सी
तुम चाँद से
और मैं रात सी
तुम थकन से
मैं जगन सी
तुम लगन से
मैं अगन सी
तुम कमल से
मैं जल सी
तुम जाने कैसे कैसे
और में बस तुम जैसी
भीगी.डूबी,खोई,इठलाई,
जागी,अधीर,और चंचल सी
प्रेम का प्याला पिए एक बावरी  
बोलो ......थाम सकोगे क्या
हाथ मेरा उस पल में  भी

जब मैं हो जाउंगी मीरा जैसी 

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